प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना – PMFBY

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के द्वारा किसान बहुत कम प्रीमियम दरों पर फसलों के लिए बीमा कवर ले सकते है। यह योजना प्राकृतिक आपदा के कारण फसल को होने वाले नुक़सान के खिलाफ किसान को वित्तीय सुरक्षा या क्षतिपूर्ति देती है। इस योजना के अंतर्गत सभी किसान बीमा सुरक्षा प्राप्त करने के पात्र है।

शुरुआत13 जनवरी 2016
उद्देश्यकम प्रीमियम दरों पर किसानों की पैदावार के लिए एक बीमा कवर प्रदान करना जिससे अप्रत्याशित घटनाओं के कारण फसल में हानि/क्षति से पीड़ित किसानों को आर्थिक सहायता मुहैया करवाई जा सके।
लक्ष्यप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के द्वारा आने वाले 3 सालों में सरकार द्वारा 8,800 करोड़ खर्च करने के साथ ही 50% किसानों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रबंधन मंत्रालयकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
योजना पर निगरानी किसके द्वारा होती हैसंबंधित राज्य की मौजूदा फसल बीमा पर राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCCCI) जिम्मेदार होगी हालांकि कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग (डीएसी और परिवार कल्याण) के संयुक्त सचिव (क्रेडिट) की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय स्तर की निगरानी समिति (NLMC) राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना की निगरानी करेगी।
सम्मिलित किसानअधिसूचित क्षेत्रों में अधिसूचित फसलें उगाने वाले बटाईदारों व किराये पर खेती करने वाले किसानों सहित सभी किसान बीमा सुरक्षा प्राप्त करने के पात्र है। यह योजना गैर-कर्जदार किसानों के लिए स्वैच्छिक है।
बीमा कवरेजफसल बीमा में सम्मिलित अधिसूचित फसल हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि, राज्य सरकार की अधिसूचना अथवा राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल में परिभाषित की गयी राशि को बोये गये क्षेत्र से गुणा कर निकाली गयी धनराशि के बराबर होगी।
केंद्र एवं राज्य सरकार की हिस्सेदारीहिस्सेदारी केंद्र और राज्य सरकार द्वारा समान रूप से साझा की जायगी। हालांकि राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश अतिरिक्त सब्सिडी का विस्तार करने के लिए स्वतंत्र है।
बीमा कंपनीबीमा योजना को एक मात्र बीमा कंपनी, भारतीय कृषि बीमा कंपनी (एआईसी) द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।
प्रीमियम दरेंखरीफ फसलों के लिए केवल 2% एवं सभी रबी फसलों के लिए 1.5% का एक समान प्रीमियम का भुगतान किया जाना है। वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के मामले में प्रीमियम केवल 5% होगा।
सरकारी वेबसाइटhttps://pmfby.gov.in/ (National Crop Insurance Portal (NCIP))
एंड्रॉयड एप्पफसल बीमा ऐप्प
हेल्पलाइन नम्बर1800-116-515

PMFBY क्या है?

PMFBY किसानों की पैदावार के लिए एक बीमा सेवा है। यह योजना किसानों को उनकी फसलों के लिए बीमा कवर लेने के लिए प्रोत्साहित करती है ताकि अप्रत्याशित घटनाओं के मामले में बीमा कवर उनकी आय को स्थिर करने में मदद करे। इसका उद्देश्य किसानों पर प्रीमियम के बोझ को कम करना और बीमा दावे के निपटान की प्रक्रिया को तेज और आसान करना है। PMFBY के जरिये फसल की विफलता के कारण किसान को होने वाले वित्तीय नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा या क्षतिपूर्ति प्राप्त होती है।

यह योजना भारत सरकार के वन नेशन – वन स्कीम थीम के अनुरूप है। इसमें पिछली सभी योजनाओं (NAIS, MNAIS) की सर्वोत्तम विशेषताएं शामिल हैं और उनकी अंतर्निहित कमियों को इसमें दूर किया गया है। इस योजना का प्रशासन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है। फसल बीमा योजनाओं में भाग लेने के लिए कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग (DAC & FW) ने कृषि बीमा कंपनी (AIC) को नामित/सूची में सम्मिलित किया है। साथ ही कुछ निजी बीमा कंपनियों को भी उनकी वित्तीय ताकत, बुनियादी ढांचे, जनशक्ति और विशेषज्ञता आदि के आधार पर सम्मिलित किया गया है।

PMFBY योजना में सभी खाद्य और तिलहन फसलों और वार्षिक वाणिज्यिक / बागवानी फसलों (Annual Commercial / Annual Horticultural crops.) को शामिल किया गया है, जिनके लिए पिछले सालों के उपज के तथ्य उपलब्ध है। साथ ही बुआई से लेकर फसल कटाई के उपरांत होने वाले नुकसान व स्थानीय आपदाएं और जंगली जानवरों द्वारा आकर्मण से फसल नुकसान हेतु अतिरिक्त (add-on) बीमा सुरक्षा भी दी जाती है।

इस योजना के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में फसल बीमा की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ कुल बोई गई फसल क्षेत्र का 50% कवर करना है। इस योजना के अंतर्गत किसानों द्वारा सभी खरीफ फसलों के लिए केवल 2% एवं सभी रबी फसलों के लिए 1.5% का एक समान प्रीमियम का भुगतान किया जाना है। वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के मामले में प्रीमियम केवल 5% होगा।


योजना के उद्देश्य

प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना (PMFBY) का उद्देश्य निम्न उपायों के द्वारा कृषि में स्थायी उत्पादन का समर्थन करना है:

  • अप्रत्याशित घटनाओं से उत्पन्न फसल हानि / क्षति से पीड़ित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना
  • खेती में अपनी निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए किसानों की आय को स्थिर करना
  • किसानों को नवीन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना
  • कृषि क्षेत्र के लिए ऋण (लोन) प्रवाह बनाये रखना जिससे किसानों के (फसल) उत्पादन जोखिमों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ हीं कृषि क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा व फसल विविधीकरण, प्रतिस्पर्धा को बढ़ाते हुए विकास सुनिश्चित हो सके।
  • योजना के तहत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/महिला किसानों की अधिकतम कवरेज सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किया जाएगा।

PMFBY के फायदे

  • प्राकृतिक आपदाओं, फसल पर कीटों एवं फसल पर रोगों के कारण हुए नुकसान की स्थिति में किसानों को बीमा कवर तथा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
  • बीमा योजना को एक मात्र बीमा कंपनी, भारतीय कृषि बीमा कंपनी (एआईसी) द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। जिससे किसानों का भरोसा बना रहे और फसल बीमा में पारदर्शिता को बढ़ावा मिले।
  • PMFBY के माध्यम से किसानों द्वारा सभी खरीफ फसलों (कपास, अरहर, मक्का, मूँगफली, गन्ना, धान, बाजरा, ज्वार, तिल/जून-जुलाई के महीने में बुआई तथा अक्टूबर के महीने के आसपास कटाई) के लिए फसल बीमा हेतु केवल 2% का प्रीमियम का भुगतान किया जाना है।
  • रबी फसलों (गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों, मटर/अनाज, दलहन व तिलहन फसलें जिन्हें अक्टूबर-नवम्बर में बोया जाता है तथा फ़रवरी- मार्च के अंत में कटाई होती है) के लिए फसल बीमा हेतु केवल 1.5% का प्रीमियम का भुगतान किया जाना है।
  • वार्षिक वाणिज्यिक (गन्ना, तम्बाकू, फाइबर फसलें इत्यादि) और बागवानी फसलों (फलों में नट, फल, आलू सहित सब्जियों, कंदीय फसलें, मशरूम, कट फ्लावर समेत शोभाकारी पौधे, मसाले, रोपण फसलें और औषधीय एवम सगंधीय पौधे) के मामले में फसल बीमा हेतु प्रीमियम केवल 5% होगा।
  • किसानों द्वारा भुगतान किये जाने वाले फसल बीमा हेतु प्रीमियम की दरें बहुत ही कम हैं एवं बाकी बचा हुआ प्रीमियम का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा।
  • सरकारी सब्सिडी पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है। भले ही शेष प्रीमियम 90% हो, यह सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
  • किसी क्षेत्र में फसलों पर जोखिम की आशंका के स्तर तीन भागों में बाटे गए है (उच्च, मध्यम, निम्न)। इन्ही स्तरों के अनुरूप क्षतिपूर्ति (insurance) के तीन स्तर, 70%, 80% और 90% बनाये गए हैं।

पिछली योजनाओं के साथ PMFBY की तुलना

  • PMFBY; राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस) एवं संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एमएनएआईएस) की एक रिप्लेसमेंट (प्रतिस्थापन) योजना है तथा इस योजना के अंतर्गत कोई भी सर्विस टैक्स नही लगता है।
  • PMFBY में फसल बीमा प्रीमियम दर; पुरानी दोनों योजनाओं से बहुत कम है साथ ही इन दोनों योजनाओं की तुलना में PMFBY; पूरी बीमा राशि को कवर करती है।
  • PMFBY से पहले की योजनाओं (राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना व संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना) में फसल बीमा हेतु प्रीमियम दर को ढकने का प्रावधान था जिसके कारण किसानों के लिये भुगतान के कम दावे पेश किये जाते थे। ये कैपिंग; सरकारी सब्सिडी प्रीमियम के खर्च को सीमित करने के लिये थी, जिसे अब हटा दिया गया है और किसान को बिना किसी कमी के दावा की गई राशी के खिलाफ पूरा दावा (फसल पर बीमित राशि) मिल जायेगा।
  • इस योजना के अंतर्गत काफी हद तक टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। दावा भुगतान में होने वाली देरी को कम करने के लिए, फसल काटने के डेटा को एकत्रित एवं अपलोड करने हेतु स्मार्ट फोन, रिमोट सेंसिंग ड्रोन और GPS तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

PMFBY में कवरेज

1. किसानों के लिए कवरेज

  • अधिसूचित क्षेत्रों (आर्थिक असमानता वाले क्षेत्र तथा वे क्षेत्र जहां अधिक ST वर्ग के लोग निवास करते हो) में अधिसूचित फसल (धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, अरहर, मिर्च इत्यादि) उगाने वाले पट्टेदार/जोतदार किसानों सहित सभी किसान कवरेज के लिए पात्र है।
  • गैर ऋणी (जो किसान कर्ज़दार नहीं है) किसानों को राज्य में लागू भूमि रिकार्ड अधिकार(ROR), भूमि कब्जा प्रमाण पत्र (LPC)आदि आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा अनुमति अधिसूचित लागू अनुबंध, समझौते के विवरण आदि अन्य सम्बंधित दस्तावेज होने भी आवश्यक है।
  • अनिवार्य घटक वित्तीय संस्थाओं से अधिसूचित फसलों के लिए मौसमी कृषि कार्यों (seasonal agricultural operations) के लिए ऋण लेने वाले सभी किसान अनिवार्य रूप से कवर होंगें।
  • स्वैच्छिक घटक गैर ऋणी किसानों के लिए योजना वैकल्पिक होगी।
  • योजना के तहत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/महिला किसानों की अधिकतम कवरेज सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किया जाएगा।
  • इस के तहत बजट अलोटमेंट (आबंटन) और उपयोग संबंधित राज्य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/सामान्य वर्ग द्वारा भूमि; भूमि-धारण के अनुपात में होगा।
  • किसानों के बीच फसल बीमा योजना का विस्तार और जागरूकता, बाधित बुआई/रोपण जोखिम, स्थानीयकृत जोखिमों के लिए किए गए दावों का मूल्यांकन करने के समय किसानों के बारे में जानकारी प्राप्त करना, फसल कटाई उपरांत हानि और दावों आदि के एडवांस भुगतान के बारे में पंचायती राज संस्थाओं (PRI) को शामिल किया जा सकता है।

2. फसलों के लिए कवरेज

  • खाद्य फसलें (अनाज, बाजरा और दालें)
  • तिलहन
  • वार्षिक वाणिज्यिक/वार्षिक बागवानी की फसलें

बहुवर्षिक फसलों के अलावा जिन बहुवर्षिक बागवानी फसलों के लिए उपज आकलन हेतु मानक पद्धति उपलब्ध है, उन फसलों के लिए बीमा सुरक्षा हेतु पायलट किए जा सकते है।

3. जोखिम के लिए कवरेज

  • बाधित बुआई / रोपण / निष्फल अंकुरण जोखिम – बीमा किए हुए क्षेत्र में कम वर्षा अथवा विपरीत मौसमी स्थिति के कारण बुआई/रोपण/अंकुरण न होने एवं रोक के कारण होने वाली हानि से किसानों को सुरक्षा प्रदान होती है।
  • खड़ी फसल (बुवाई से कटाई तक के लिए) – नही रोके जा सकने वाले जोखिमों जैसे सूखा, अकाल, बाढ़, सैलाब, कीट एवं रोग, भूस्खलन, प्राकृतिक आग और बिजली, तूफान, ओले, चक्रवात, आंधी, टेम्पेस्ट, तूफान और बवंडर आदि के कारण उपज के नुकसान को कवर करने के लिए व्यापक जोखिम बीमा प्रदान की जाती है।
  • फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान – फसल कटाई के बाद चक्रवात और चक्रवाती बारिश और बेमौसम बारिश के विशिष्ट खतरों से उत्पन्न हालत के लिए कटाई से अधिकतम दो सप्ताह की अवधि के लिए कवरेज उपलब्ध है। यह वे फसल होती जिन्हें कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए छोड़ा जाता है।
  • स्थानीयकृत आपदायें – अधिसूचित क्षेत्र में मूसलधार बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसे स्थानीय जोखिम की घटना से प्रभावित पृथक खेतों को उत्पन्न हानि/क्षति की स्थिति में बीमा का लाभ प्राप्त होता है।
  • जंगली पशुओं द्वारा आक्रमण से फसल नुकसान हेतु अतिरिक्त बीमा (Add-on) सुरक्षा – सरकारे जंगली पशुओं के आक्रमण की वजह से कथित तौर पर ठोस व पहचान योग्य फसल के नुकसान के लिए अतिरिक्त बीमा सुरक्षा प्रदान करने पर विचार कर सकते हैं।

4. बीमित राशि/कवरेज की सीमा

  • अनिवार्य घटक के तहत ऋणी किसानों के मामले में बीमित राशि जिला स्तरीय तकनीकी समिति (DLTC) बीमित द्वारा निर्धारित वित्तिय माप के बराबर होगा। जिसे बीमित किसान के विकल्प पर बीमित फसल की अधिकतम उपज के मूल्य तक बढ़ाया जा सकता है।
  • यदि अधिकतम उपज का मूल्य ऋण राशि से कम है तो बीमित राशि अधिक होगी अर्थात अधिकतम फसल पैदावार की राशि यदि कर्ज़/लोन से कम है तो बीमा की राशि अधिक होगी।
  • राष्ट्रीय अधिकतम उपज को चालू वर्ष के न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP (किसी कृषि उपज (जैसे गेहूं धान आदि) का न्यूनतम समर्थन मूल्य वह मूल्य है जिससे कम मूल्य देकरकिसान से सीधे वह उपज नहीं खरीदी जा सकती) के साथ गुणा करने पर बीमा राशि का मूल्य प्राप्त होता है।
  • जहां कहीं भी चालू वर्ष का न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध नहीं है उस स्थिति में पिछले वर्ष का न्यूनतम समर्थन मूल्य अपनाया जाएगा।
  • जिन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा नहीं की गई है, विपणन विभाग/बोर्ड द्वारा स्थापित मूल्य अपनाया जाएगा।
  • कृषि के अधीन क्षेत्र का विवरण हमेशा हेक्टर में किया जाएगा।

किसानों द्वारा वहन की जाने वाली प्रीमियम दरें और बीमा शुल्क

बीमांकिक प्रीमियम दर (APR) को PMFBY के अंतर्गत बीमा लागू करने वाली कंपनी द्वारा लिया जायगा।
बीमा लागू करके PMFBY के तहत लिया जाएगा। किसान द्वारा देय प्रीमियम की दर निम्नानुसार होगी:

क्र.संख्याफसलकिसान द्वारा अधिकतम देय बीमा शुल्क(बीमित राशि प्रतिशत)
1खरीफ फसलों हेतु2%
2रबी फसलों हेतु1.5%
3वार्षिक वाणिज्यिक फसलों एवं बागवानी फसलों हेतु5%

बीमा प्रीमियम कैलकुलेटर

  1. बीमा प्रीमियम कैलकुलेटर का उपयोग कर किसान पहले से ही अपने बीमा प्रीमियम को जान सकते हैं। गणना करने हेतु आपको सर्वप्रथम आधिकारिक वेबसाइट के पोर्टल को खोलना होगा।
  2. पोर्टल को आप अपनी भाषा में भी समझ सकते हैं, दाईं ओर के टॉप कॉर्नर पर भाषा बदलें/change language के बटन पर क्लिक कर इसे अपनी समझ की भाषा में बदलें।
  3. आपको पोर्टल में 6 अलग-अलग डिब्बे दिखाई देंगे जिनमें विभिन्न-विभिन्न जानकारियां उपलब्ध है। गणना करने हेतु आप दूसरे नम्बर का विकल्प (बीमा प्रीमियम कैलकुलेटर) चुने।
  4. बीमा प्रीमियम कैलकुलेटर पर क्लिक करने के पश्चात आपके सामने एक अलग खिड़की खुलेगी जहां आपको पोर्टल पर पूछी गई जानकारियां भरनी होगी जैसे सीज़न(season), वर्ष(year), स्कीम(scheme), राज्य(state), ज़िला(district),फसल(crop), एरिया(area)।
  5. सभी जानकारियां भरने के पश्चात आप नीचे दिए गए Calculate बटन पर क्लिक करें और अपनी फसल से जुड़ी बीमा प्रीमियम की जानकारी प्राप्त करें।
  6. जहां आपको ज्ञात होगा की किसान द्वारा चुनी गई फसल हेतु सरकार एवं किसान द्वारा कितना-कितना प्रीमियम देना होगा, एवं किसान को यह भी ज्ञात होगा की चुनी गई फसल हेतु बीमा कितने रुपये तक का होगा या हुआ है।

PMFBY में बीमा कब प्राप्त नहीं होता है?

फसल बीमा योजना के अंतर्गत निम्न कारणों के कारण फसलों के नुकसान में बीमा कवर लागू नहीं किया जाता है।

  • युद्ध और आत्मीय खतरे
  • परमाणु जोखिम
  • दंगा
  • दुर्भावनापूर्ण क्षति
  • चोरी या शत्रुता का कार्य होने पर बीमा प्राप्त नहीं होता है, इस स्थिति में पुलिस सहायता उपयुक्त उपाय है।
  • घरेलू और/या जंगली जानवरों द्वारा चरे जाना और अन्य रोके जा सकने वाले जोखिमों को कवरेज से बाहर रखा जाएगा।
  • मनुष्य द्वारा निर्मित आपदाओं जैसे; आग लगना, चोरी होना, सेंध लगना आदि को इस योजना के अन्तर्गत शामिल नहीं किया जाता है।

PMFBY के लिए ज़रूरी दस्तावेज

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन अथवा दावा करने हेतु निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।

  1. किसान की एक फोटो।
  2. किसान पहचान पत्र (पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड)।
  3. जाति प्रमाण पत्र।
  4. अगर खेत आपका अपना है तो इसका खसरा नंबर / खाता नंबर का पेपर साथ में रखें।
  5. खेत में फसल की बुवाई हुई है, इसका सबूत पेश करना होगा।
  6. इसके सबूत के तौर पर किसान; पटवारी, सरपंच, प्रधान जैसे लोगों से एक पत्र लिखवा सकते हैं।
  7. अगर खेत बटाई या किराए पर लेकर फसल की बुवाई की गयी है, तो खेत के मालिक के साथ करार की कॉपी की फोटोकॉपी जरूर ले जायें।
  8. फसल को नुकसान होने की स्थिति में पैसा सीधे आपके बैंक खाते में पाने के लिए एक रद्द चेक लगाना जरूरी है।
  9. आवास प्रमाण पत्र(ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड)।
  10. बैंक विवरण(खाता संख्या, IFCS इत्यादि)।
  11. मोबाइल नम्बर।

PMFBY में ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

यदि आप फसल बीमा योजना में स्वयं आवेदन नहीं कर सकते हैं तो अपने नज़दीकी ई-मित्र सेवा केंद्र में जाकर आवेदन करवा सकते हैं। यदि आप ऑफलाइन फसल बीमा योजना में आवेदन करना चाहते हैं तो अपने नज़दीकी बैंक शाखा से PMFBY फ़ॉर्म भर कर आवेदन कर सकते हैं।

  • ऑनलाइन फसल बीमा आवेदन के लिए आप सर्वप्रथम आधिकारिक वेबसाइट के पोर्टल पर जाएं।
  • पोर्टल को आप अपनी भाषा में भी समझ सकते हैं, दाईं ओर के टॉप कॉर्नर पर भाषा बदलें/change language के बटन पर क्लिक कर इसे अपनी समझ की भाषा में बदलें।
  • आपको पोर्टल में 6 अलग-अलग डिब्बे दिखाई देंगे जिनमें विभिन्न-विभिन्न जानकारियां उपलब्ध है। आवेदन करने हेतु आप प्रथम नम्बर का विकल्प (किसान का आवेदन) चुने।
  • यहां आपके सामने एक खिड़की खुलेगी, जहां दो विकल्प उपस्थित होंगे Login for Farmer और Guest Farmer, यदि इस पोर्टल पर आपका रजिस्ट्रेशन पहले से हुआ है तो आपको Login for Farmer बटन पर क्लिक करना होगा अन्यथा आप रजिस्ट्रेशन हेतु Guest Farmer पर क्लिक करें।
  • Guest Farmer पर क्लिक करने के पश्चात आपके सामने एक नई खिड़की खुलेगी जहां आपसे आपका सम्पूर्ण विवरण मांगा जाएगा, जैसे आवेदक का नाम, आवेदक के पिता/पति इत्यादि का नाम, मोबाइल नम्बर (यहां मोबाइल नम्बर verify करने के लिए Captcha Code भरना होगा तथा OTP नम्बर डालना होगा), आयु, जाति श्रेणी, किसान श्रेणी, आवासीय जानकारी जैसे राज्य, ज़िला, तहसील, गाँव, पंचायत, ब्लॉक इत्यादि, किसान ID(UID आधार नम्बर), आवेदक की बैंक की सामान्य जानकारी, सम्पूर्ण जानकारी भरने के पश्चात अंत में सही Captcha Code भरने के पश्चात Create User के बटन पर क्लिक कर आगे बढ़े।
  • अब आपका फसल बीमा पोर्टल पर सत्यापित अकाउंट बन चुका है, अब आवेदक पुनः पोर्टल के पहले पेज पर प्रथम विकल्प Login for Farmer को चुने।
  • यहां आपसे आपका रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर व दिखाया गया Captcha Code पूछा जाएगा, तत्पश्चात आपको Request for OTP बटन पर क्लिक करना होगा। यहां आपके मोबाइल नम्बर पर OTP आएगा जिसे भरने के बाद आपको Submit बटन पर क्लिक करना होगा।
  • यहां आपने जो भी जानकारियां पहले भरी थी वे सभी जानकारियां आपको दिखाई देगी। Next बटन पर क्लिक कर आगे बढ़ें।
  • अब आपको अपने बैंक की सभी जानकारियां भरनी होगी, नेक्स्ट बटन पर क्लिक कर आगे बढ़ें।
  • आवेदक को अब अपने राज्य, ज़िला, तहसील, गाँव, पंचायत, ब्लॉक के साथ-साथ स्कीम, सीज़न, वर्ष व फसल के बारे में जानकारी उपलब्ध करवानी होगी।
  • पोर्टल पर आवेदक सर्वे/खाता नम्बर खसरा/प्लॉट नम्बर एवं एरिया की जानकारी भरकर पास ही में दिए गए ADD बटन पर क्लिक करें।
  • दिखाई दे रहे पोर्टल पर आवेदक को तीन मुख्य दस्तावेज फाइल अपलोड करनी होगी। Next बटन पर क्लिक कर आगे बढ़ें।
    • पासबुक फोटो(जो खाता संख्या आपने आपने बैंक की डाली है)
    • जमीनी रेकॉर्ड/पट्टा
    • Sowing Certificate
  • अब पोर्टल आपको आपका बैंक विवरण व फसल बीमा प्रीमियम की सम्पूर्ण जानकारी दिखाएगा। नीचे दिखाई दे रहे Make Payment बटन पर क्लिक कर आगे बढ़ें।
  • Make Payment बटन पर क्लिक करने के पश्चात आपसे नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड इत्यादि विकल्प पूछे जाएंगे, जिन्हें पूरा कर आप अपना बीमा प्रीमियम कर सकते हैं।

PMFBY में बीमा के क्षतिपूर्ति कैसे और कितने दिनों में प्राप्त होते हैं?

  • बैंकों के माध्यम से कवरेज हेतु – विशेष राशि के साथ किसानों द्वारा दावा राशि व्यक्तिगत नोडल बैंकों (नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर एनएलडीसी एक नोडल एजेंसी है, जो सीईआरसी (पीएसडीएफ) अधिनियम, 2014 के तहत योजना का कार्यान्वयन करती है) को जारी की जाएगी। जमीनी स्तर पर बैंक; व्यक्तिगत किसानों के खातों में रुपये जमा करेंगे तथा अपने नोटिस बोर्ड पर लाभार्थियों का विवरण प्रदर्शित करना होगा। बैंक IAA को व्यक्तिगत किसान विवरण व क्रेडिट विवरण प्रदान करेंगे और केंद्रीकृत डेटा रिपॉजिटरी में शामिल किए जाएंगे।
  • अन्य बीमा मध्यस्थों के माध्यम से कवरेज हेतु – व्यक्तिगत बीमाधारक बैंक खाते में दावा राशि इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी की जाएगी।
  • किसानों को बीमा की राशि प्राप्त करने हेतु यह आवश्यक होता है की वे फसल की बुआई के 10 दिनों के अंदर PMFBY का फॉर्म भर दें।
  • फसल कटने के 30 दिनों के भीतर दावों का भुगतान किया जाता है।

PMFBY में पॉलिसी की स्थिति कैसे जाने?

  • PMFBY के अंतर्गत पॉलिसी की स्थिति जानने के लिए आप सर्वप्रथम आधिकारिक वेबसाइट के पोर्टल पर जाएं।
  • पोर्टल को आप अपनी भाषा में भी समझ सकते हैं, राइट साइड के टॉप कॉर्नर पर भाषा बदलें/change language के बटन पर क्लिक कर इसे अपनी समझ की भाषा में बदलें।
  • आपको पोर्टल में 6 अलग-अलग डिब्बे दिखाई देंगे जिनमें विभिन्न-विभिन्न जानकारियां उपलब्ध है। पॉलिसी की स्थिति जानने के लिए आप चौथे नम्बर का विकल्प (पॉलिसी की स्थिति) चुने।
  • यहां आपके सामने एक खिड़की खुलेगी जहां आपसे रेसेप्ट नंबर पूछा जाता है जिसे भर कर आप कॅप्टचा कोड डाले तथा चेक स्टेटस पर क्लिक करें।
  • आपकी पॉलिसी से जुड़ी सभी जानकारियां उपलब्ध हो जाएगी।

PMFBY के अंतर्गत प्रबंधन और योजना की निगरानी

  • राज्य में योजना के कार्यक्रम की निगरानी के लिए संबंधित राज्य की मौजूदा फसल बीमा पर राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCCCI) जिम्मेदार होगी।
  • हालांकि कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग (डीएसी और परिवार कल्याण) के संयुक्त सचिव (क्रेडिट) की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय स्तर की निगरानी समिति (NLMC) राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना की निगरानी करेगी।
  • नोडल बैंकों के बिचौलिये आगे मिलान के लिए बीमित किसानों (ऋणी और गैर-ऋणी दोनों) की सूची अपेक्षित विवरण जैसे नाम, पिता का नाम, बैंक खाता नंबर, गांव, श्रेणी – लघु और सीमांत समूह, महिला, बीमित होल्डिंग, बीमित फसल, एकत्र प्रीमियम, सरकारी सब्सिडी आदि सॉफ्ट कॉपी में संबंधित शाखा से प्राप्त कर सकते हैं।
  • संबंधित बीमा कंपनियों से दावों की राशि प्राप्त करने के बाद, वित्तीय संस्थाओं/बैंकों को एक सप्ताह के भीतर दावा राशि लाभार्थियों के खाते में डाल देनी चाहिए। इसे किसानों के खातों में बीमा कंपनी द्वारा सीधे ऑनलाइन डाल दिया जाएगा।
  • लाभार्थियों की सूची (बैंकवार एवं बीमित क्षेत्रवार) फसल बीमा पोर्टल एवं संबंधित बीमा कंपनियों की वेबसाइट पर अपलोड किया जा सकता है।
  • करीब 5% लाभार्थियों को क्षेत्रीय कार्यालयों/बीमा कंपनियों के स्थानीय कार्यालयों द्वारा सत्यापित किया जा सकता है जो संबंधित जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC) और राज्य सरकार/फसल बीमा पर राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCCCI) को प्रतिक्रिया भेजेंगें।
  • बीमा कंपनी द्वारा सत्यापित लाभार्थियों में से कम से कम 10% संबंधित जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC) द्वारा प्रतिसत्यापित किए जायेंगें और वे अपनी प्रतिक्रिया राज्य सरकार को भेजेंगें।
  • लाभार्थियों में से 1 से 2% का सत्यापन बीमा कंपनी के प्रधान कार्यालय/केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त स्वतंत्र एजेंसियों/राष्ट्रीय स्तर की निगरानी समिति द्वारा किया जा सकता है और वे आवश्यक रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भेजेंगें। 
  • जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC) जो पहले से ही चल रही फसल बीमा योजनाओं जैसे राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस), मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS), संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS) और नारियल पाम बीमा योजना (CPIS) के कार्यान्वयन और निगरानी की देखरेख कर रही है, योजना के उचित प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगी।

PMFBY के अंतर्गत महत्वपूर्ण बिंदु:

  • फसल की बुआई के 10 दिनों के अंदर आपको PMFBY का फॉर्म भरना जरूरी है।
  • PMFBY के अंतर्गत पोस्ट हार्वेस्ट नुक़सान को भी शामिल किया गया है फसल काटने से 14 दिनों के बीच अगर आपकी फसल को प्राकृतिक आपदा के कारण नुकसान होता है, तब भी आप बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं।
  • बीमा की रकम का लाभ तभी मिलेगा जब आपकी फसल किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से ही खराब हुई हो।
  • दावा भुगतान में होने वाली देरी को कम करने के लिए फसल काटने के आंकड़े जुटाने एवं उसे साईट पर अपलोड करने के लिए स्मार्ट फोन, रिमोट सेंसिंग ड्रोन और जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
  • बीमित किसान यदि प्राकृतिक आपदा के कारण बोनी नहीं कर पता है तो यह जोखिम भी PMFBY में शामिल है, उसे दवा राशि मिल सकती है।